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कूनो नेशनल पार्क में खुशखबरी, भारत में जन्मी मादा चीता ने चार शावकों को दिया जन्म

भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारत में जन्मी एक मादा चीता ने कूनो नेशनल पार्क में चार शावकों को जन्म दिया है।
यह जानकारी भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम यानी प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद सामने आई। केंद्रीय मंत्री ने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया।
भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “प्रोजेक्ट चीता के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक और खुशी का पल! भारत के चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है।”
A truly historic and joyous moment for Project Cheetah!
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) September 18, 2026
A day after India's Cheetah Project completed four years, KGP12, an Indian-born female cheetah, has given birth to four cubs in Kuno.
Four years, four new lives—a beautiful symbol of hope, resilience and the growing… pic.twitter.com/f1zbqSvx1b
मंत्री की इस घोषणा के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्साह है। चार नए शावकों के जन्म को भारत में चीता संरक्षण अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत में चीता को दोबारा बसाने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना के तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को भारत लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। लंबे समय बाद देश में चीता की वापसी को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
कूनो नेशनल पार्क को चीतों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यहां चीतों के रहने, शिकार और प्रजनन के लिए जरूरी व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं।
मादा चीता KGP12 के शावकों का जन्म भारत में चीता आबादी बढ़ाने के प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़ना इस परियोजना की सफलता के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी प्रजाति को नए वातावरण में स्थापित करने के लिए प्रजनन प्रक्रिया बेहद अहम होती है। चीतों का सफल प्रजनन उनके संरक्षण कार्यक्रम की प्रगति को दर्शाता है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों की टीमें चीतों की निगरानी, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा पर काम कर रही हैं।
चार शावकों के जन्म की खबर ऐसे समय आई है, जब भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम के चार वर्ष पूरे हुए हैं। इस दौरान चीतों की देखभाल, उनके व्यवहार और प्राकृतिक वातावरण में अनुकूलन को लेकर लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
कूनो नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है और इसे चीता पुनर्स्थापना परियोजना के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां चीतों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और वन विभाग का उद्देश्य भारत में चीता की स्थायी आबादी तैयार करना है। इसके लिए वैज्ञानिक निगरानी, आवास प्रबंधन और संरक्षण उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
मादा चीता द्वारा चार शावकों को जन्म देना इस दिशा में एक उत्साहजनक कदम माना जा रहा है। हालांकि, शावकों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए आने वाले समय में विशेष देखभाल की जरूरत होगी।
वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, शावकों के शुरुआती महीने बेहद संवेदनशील होते हैं। इस दौरान उनकी सुरक्षा, भोजन और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाती है।
भारत में चीता की वापसी को लेकर देशभर में रुचि रही है। अब कूनो में नए शावकों के जन्म से इस परियोजना को नई उम्मीद मिली है।
फिलहाल वन विभाग की टीमें मादा चीता और चारों शावकों की निगरानी कर रही हैं। आने वाले समय में इन शावकों के विकास और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी।





